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बच्चों में अच्छे संस्कार

बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में मां-बाप की भूमिका काफी अहम होती है। अगर शुरू से ही आप अपने बच्चे को समझें और उनका मार्गदर्शन करें, तो आपका बच्चा जरूर आपकी मानेगा...
हर किसी का पेरेंटिंग स्टाइल अलग होता है। इसे एक निश्चित फॉर्मूले में बांध कर नहीं रखा जा सकता। सच कहूं, तो सभी बच्चे एक समान होते भी नहीं हैं। उनकी सारी आदतें एक-दूसरे से अलग होती हैं। कोई ज्यादा शरारती होता है, तो कोई उससे थोड़ा कम। ऐसे में उनको अपने माहौल में ढालने के लिए मशक्कत तो करनी ही पड़ती है। सबसे ज्यादा परेशानी तो उन महिलाओं के साथ है, जो वर्किंग हैं। प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ उनको अपने बच्चे के लिए समय निकालना पड़ता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि व्यस्त जीवनशैली का दुष्प्रभाव सबसे ज्‍यादा बच्चों पर पड़ रहा है। किंतु पेरेंट्स भी क्या करें, उनकी भी मजबूरी है। व्यस्तता के बावजूद आप अपने बच्चे को क्वालिटी टाइम देकर उसे सही मार्गदर्शन दे सकती हैं... 

ग्रोइंग एज, डाइट हो भरपूर
बढ़ते बच्चे को न्यूट्रिशंस से भरपूर डाइट की जरूरत होती है। जो भी उसे खाने के लिए दें, उसकी न्यूट्रिनल वैल्यू जरूर देखें। मिल्क या प्रोटीन से भरपूर सोया प्रोडक्ट डाइट में जरूर शामिल करें। जंक या फास्ट फूड से दूर ही रखें। कभी-कभार तो ठीक है, पर हमेशा नहीं। घर पर ही बदल-बदल कर उसे कुछ-न-कुछ खाने के लिए दें, वह बाहर खाने की जिद नहीं करेगा। 

व्यवहारिक बातें जरूर सिखाएं
बच्चे में अच्छे संस्कार विकसित करना चाहती हैं, तो शुरू से ही वो संस्कार डालें। जैसे बड़ाें से बात करने का तरीका, अभिवादन, थैंक्यू, सॉरी कहना जरूर सिखाएं। हाइजीन मेनटेन करना, पार्टी एटिकेट्स, रेस्टोंरेंट मैनर इन सब चीजों को आप तो फॉलो करें ही, बच्चों को भी सिखाएं। कुछ चीजें तो वो आपसे देखकर ही सीख सकता है। इसलिए आप भी अपने व्यवहार में थोड़ा बदलाव लाएं आैर उनकी रोल मॉडल बनें। 
कम्युनिकेशन कम न करें
बच्चों के नजदीक रहने का सबसे सरल तरीका है उनसे बातचीत। आप बच्चों से बात करके उनका विश्‍वास जीत सकती हैं। बातचीत की स्थिति में बच्चे आपसे अपने मन की बात कहने से नहीं डरेंगे। वो अपनी हर बात आपसे शेयर करेंगे। बच्चों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण भी न रखें। उनको भी थोड़ा स्पेस दें और उन्हें कभी-कभी अपने मन की करने दें। कई बार पेरेंट्स बच्चों के साथ जरूरत से ज्यादा सख्ती बरतते हैं। ऐसे में बच्चे डर से बचने के लिए झूठ का सहारा लेने लगते हैं। इसलिए ऐसा माहौल कभी न बनाएं। 
गाइड करें
अकसर देखने में आता है कि जैसे ही पेपर नजदीक आता है, बच्चों पर पढ़ाई का दबाव बनाया जाने लगता है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। हर दिन थोड़ा-थोड़ा अच्छी तरह से पढ़ाया जाए और समय-समय पर खुद रिवीजन करवाएं, तो अचानक से बच्चों पर दबाव नहीं बनेगा। जहां उसे दिक्कत है, उसके लिए एक्‍स्ट्रा मेहनत आप करें। अगर ट्यूटर की जरूरत है, तो उसका भी अरेंजमेंट करें। मगर सब कुछ उसी के ऊपर न छोड़ें। खुद भी वीकेंड में उसकी पढ़ाई में मदद करें। महत्वपूर्ण चीजों के नोट्स बनाएं। 
याद करने में उसकी मदद करें। डांट-डपटकर उनको कुछ भी नहीं सिखाया जा सकता, इसलिए उसकी क्षमता को पहचान कर ही उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। अगर एग्जाम का समय है, तो उसके साथ बैठकर उसकी समस्या को जानें और उससे बाहर निकलने का रास्ता सुझाएं। तनाव को उसके ऊपर हावी न होने दें।



बच्चों में अच्छे संस्कार बच्चों में अच्छे संस्कार Reviewed by NARESH THAKUR on Monday, March 12, 2012 Rating: 5

1 comment:

  1. सही कहा आपने हर बच्चा एक सा नहीं होता सबै अपन एक अलग व्यवहार एवं क्षमता होती है उसके आधार पर ही सभी अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ उनके बाल मनोविज्ञान को समझते हुए ही आगे बढ़ना चाहिए। सार्थर्क पोस्ट आभार...

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