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हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की बारिकियां


अस्पतालों में बीमारी के इलाज के लगातार बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना वास्तव में जरूरी हो गया है। लेकिन जरूरी यह भी है कि आप अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को समझें। उसके नियम एवं शर्तों की जानकारी आपको भली-भांति होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

हाल ही में मेरे एक मित्र अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को समय पर रिन्यू कराना भूल गए। यह पॉलिसी उन्होंने एक जानी-मानी सरकारी बीमा कंपनी से ली थी। पॉलिसी रिन्यू कराने की नियत तारीख से चार दिन बाद जब उन्होंने उस बीमा कंपनी की नजदीकी शाखा में अपनी पॉलिसी रिन्यू कराने गए तो उनसे कहा गया कि पॉलिसी लैप्स हो चुकी है और अब आपको नई पॉलिसी लेनी होगी।

नई पॉलिसी लेने का मतलब था कि पुरानी पॉलिसियों के सभी लाभों जैसे नो क्लेम बोनस, पहले से मौजूद बीमारियों की प्रतीक्षा अवधि आदि के लाभों से हाथ धोना। उन्होंने बीमा कंपनी के अधिकारी की बात मानते हुए नई पॉलिसी ले ली।

बाद में मालूम हुआ कि वह कोई अधिकारी नहीं बल्कि शाखा में बैठा हुए एक बीमा एजेंट था जो कमीशन पाने की खातिर मेरे मित्र को नई पॉलिसी लेने की सलाह दी। अधिकतर बीमा कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस को रिन्यू कराने के लिए 14-15 दिनों का ग्रेस पीरियड देती हैं।

पॉलिसी प्रीमियम के रिन्यू कराने की नियत तारीख से 14-15 दिन बाद तक अपने पुराने लाभों के साथ पॉलिसी रिन्यू करा सकते हैं लेकिन समय पर प्रीमियम न भरने का कारण आपको लिखित में देना होगा। इसलिए केवल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना ही जरूरी नहीं है बल्कि उसकी बारीकियों को समझना और उससे जुड़े नियमों की जानकारी भी जरूरी है। इसके लिए, हमें कोई भी हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले पॉलिसी की कुछ मूल बातें और पॉलिसी शर्तों को पढऩे व समझने की जरूरत भर है।

कैपिंग
कई इंश्योरेंस कंपनियां किसी खास बीमारी/रोग की स्थिति में अस्पताल के कमरे के किराए, डॉक्टर की फीस व अधिकांश भुगतान पर कैपिंग देती हैं। तय सीमा से अधिक खर्च होने पर, ये कैपिंग कैशलेस सुविधाएं देने से इनकार कर देती हैं। बेहतर होगा कि आप इन सभी कैपिंग के बारे में जांच-पड़ताल कर यह सुनिश्चित कर लें कि किसी प्रकार की इमरजेंसी की स्थिति में ये कैपिंग अस्पताल की आपकी प्राथमिकताओं से मिलती हैं या नहीं।

ग्रेस पीरियड
कई ग्राहक रियायती अवधि के रूप में मिलने वाले फायदे से अंजान होते हैं। प्रत्येक इंश्योरेंस पॉलिसी में 14-30 दिनों तक का रियायती समय होता है। जिसका मतलब है कि आप बिना किसी झंझट के अपनी पॉलिसी को रिन्यूअल की तारीख के 14-30 दिनों के अंदर रिन्यू करा सकते हैं। अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी कंपनी 30 दिनों का ग्रेस पीरियड देती है लेकिन ग्रेस पीरियड के दौरान किसी तरह के क्लेम का निपटान नहीं करती है।

ओरियंटल इंश्योरेंस के जनरल मैनेजर (हेल्थ) के. के. राव ने बताया कि अगर कोई पॉलिसीधारक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स होने के 15 दिनों के भीतर अपनी पॉलिसी रिन्यू कराता है तो उसे पिछली पॉलिसी का पूरा लाभ मिलेगा लेकिन इस अवधि के दौरान किसी भी तरह के क्लेम का निपटान नहीं किया जाता है।

फ्री-लुक अवधि
फ्री-लुक अवधि सभी सालाना पॉलिसियों पर मौजूद नहीं है। कुछ स्वास्थ्य और साधारण बीमा कंपनियां 15 दिनों का फ्री-लुक पीरियड पॉलिसीधारकों को देती हैं। अगर किसी कारणवश पॉलिसीधारक पॉलिसी से संतुष्ट नहीं है तो वह 15 दिनों के भीतर उसे वापस कर सकता है। मैक्स बुपा और अपोलो म्यूनिख के ऑप्टिमा रिस्टोर आदि पॉलिसियों के तहत 15 दिनों का फ्री-लुक पीरियड उपलब्ध है।

लोडिंग एवं सह-भुगतान:
अगर आपने पहले वर्ष में कोई क्लेम किया है तो कंपनियां आम तौर पर आपके रिन्यूअल प्रीमियम पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं। खास तौर पर यह फैमिली फ्लोटर पॉलिसी का एक सबसे नकारात्मक पहलू हैं क्योंकि अगर परिवार का कोई एक सदस्य अस्पताल में भर्ती होता है और वह क्लेम करता है तो ऐसी स्थिति में सभी सदस्यों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

मेडिकल जांच के दौरान उसमें किसी गड़बड़ी के आने पर भी लोडिंग लगाई जाती है। कई कंपनियों की पॉलिसी शर्तों में क्लेम किए जाने पर भी नो-लोड शर्त जारी रहती है। लेकिन कभी भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए इसे कसौटी न बनाएं।

को-पेमेंट
को-पेमेंट वह शर्त है जिसमें आपको किसी खास इलाज के लिए हॉस्पिटलाइजेशन में आने वाले कुल खर्च के एक निश्चित प्रतिशत का भुगतान करना होता है। ये शर्त महज वरिष्ठ नागरिकों की पॉलिसियों पर ही लागू होती है। विभिन्न पॉलिसियों में सह-भुगतान 10-30 प्रतिशत होता है।

क्लेम की प्रक्रिया
कंपनी के ब्रोशर में यह साफ लिखा होता है कि कैशलेस सुविधा पाने के लिए आपको अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटों के अंदर कंपनी को सूचित करना होता है। किसी भी किस्म की देरी होने पर आप इसका फायदा लेने से चूक जाएंगे। क्लेम प्रक्रिया को समझना आपके लिए जितना जरूरी है, उतना ही आपके परिवार के लिए भी जरूरी है। अपने सभी कागजातों को किसी ऐसी जगह रखें, जहां आपके परिवार की आसानी से पहुंच हो।

हॉस्पिटल नेटवर्क
कंपनी का एक खास हॉस्पिटल नेटवर्क होता है, जिसमें कैशलेस सुविधाएं मौजूद होती हैं। अगर अस्पताल कंपनी या नियामक द्वारा निर्धारित किए गए दिशा-निर्देशों की श्रेणी में नहीं आता, तो बीमित क्लेम की अदायगी से वंचित रह जाएगा। अपने अस्पताल के चयन की भी जांच करें और देखें कि यह नेटवर्क का हिस्सा है या नहीं।

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के चयन के समय इनमें से किसी एक नियम को कसौटी न बनाएं। पॉलिसी लेने से पहले पॉलिसी के सभी शब्दों को सावधानी से पढ़कर अपनी शंकाएं मिटा 

साभार:bhaskar.com
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की बारिकियां हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की बारिकियां Reviewed by NARESH THAKUR on Tuesday, April 24, 2012 Rating: 5

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